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ओ माँ सुन

लेखिका-वैशाली पाल,शिवपुरी मध्यप्रदेश       18-09-27

शहर की सबसे कम उम्र की होनहार कवियत्री वैशाली पाल द्वारा मां पर लिखी गई एक बहुत ही प्यारी करुण रस से ओतप्रोत कविता

 

ओ माँ सुन, 

तू लाख खफा रह मुझसे,पर दूर कभी न जाना

रहने देना भूखा मुझको,  पर तू खा लेना खाना

ओ माँ सुन, 

करूँ मैं जो अब गलती,तू जी भर गुस्सा होना,  

दे कर मुझे सज़ाऐ, फिर तू दुःखी मत होना,

ओ माँ सुन, 

मानी न तेरी बात कभी,  हाँ माँ मैनें माना, 

पर मायने तो मुझको रखता है तेरा वो मुस्कुराना, 

ओ माँ सुन, 

धूप भरी इस दुनिया में जो तेरी गोद न होगी, 

मेरा जीना मुश्किल हो जायेगा हाँ बस मौत न होगी, 

ओ माँ सुन, 

भले न मैने कहा कभी, 

पर मुझको चाहिये तेरी दुआएं माँ, 

ओ माँ सुन, 

बोल न क्या - क्या और करूँ मैं, 

जो तू मुझे छोड़ कभी न जाएं माँ.... ।।

 

लेखिका-वैशाली पाल,शिवपुरी मध्यप्रदेश