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बहुत देर हो जाएगी-मयंक

      18-10-21

रोते है उन्हें याद कर, शायद इन आँखों से पानी निकल आये...

आँसू तो अब बचे नही अब इनमे शायद आंख में फसा हुआ वो तिनका निकल आये....

वही तिनका जो तुम अपनी फूँक और अपने हाथों से निकाला करती थी, वही परवाह जो तुम मेरी हर शाम किया करती थी.......

मेरी परवाह ,मुझसे प्यार ,मुझको याद वो तो तेरा दिखावा था,आज समझ आया कि वो तेरा प्यार नही वो तो तेरा छलावा था .....

मिली भरी महफ़िल में तो आंख मिलाने में शर्म क्या,तोड़ा दिल तूने शौक से है लोगो को बताने में शर्म क्या.....

तू करले चाहे जितने सितम ,ये जिस्म चाहने वाले फिर भी तुझको चाहेंगे .....

पर हम तेरे साथ अब कोई भी समझौता ना कर पाएंगे....

जब कोई छोड़ेगा तुझे यू बर्बाद कर,उस दिन याद बहुत हम आएंगे....

दिल को धड़कने से शायद तुम समझा भी दो,पर हम आंखों से आंसू बनकर निकल जाएंगे पछतावा होगा तुझे तेरे करने पे ,तू खुद की नज़रों में गिर जाएगी.....

होगी बेताब मुझसे मिलने को,तू मिलना भी मुझसे चाहेगी ,जब आएगी तुझे समझ तब तक "सनम"देर बहुत हो जाएगी.....देर बहुत हो जाएगी।।

 

मयंक शर्मा

मुरैना(मप्र)

शासकीय पशु चिकित्सा एवम पशुपालन माहाविद्यालय रीवा मध्यप्रदेश