0751-4901333

तन्हाई

शशि कांत श्रीवास्तव डेराबस्सी मोहाल       18-12-14

नम आंखों की कोरों से 

वह तुम्हे खोजती, प्राण -प्रिये 

तन्हाई  के वीराने में --मै 

खोल --पोटली यादों की 

ढूंढ रहा था --उसमें तुमको 

पर ना मिली मुझे, उसमें 

देखा तो पाया मै --तुमको 

मन मंदिर के कोने में 

नम आंखों की... 

तन्हाई के दौर मे पाता -मैं 

घिरा हुआ --अपनों के बीच 

पर मै, फिर भी तन्हा होता 

ढूँढू, -तुमको --इनके बीच 

जीवन के इस मोड़ पर तेरा -रस्ता 

देख -देख, थक गई ये अखियाँ 

अब आ भी जाओ, प्राण -प्रिये 

लेकर --के --जाओ साथ मुझे 

नम आंखों की कोरों से 

वह, तुम्हे खोजती, प्राण -प्रिये