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देहाती इलाकों में हो रहा भारत के चौथे स्तंभ का दोहन

विवेक कुमार पाण्डेय सीनियर रिपोर्टर       18-07-30

 
 यू तो भारत की मीडिया( पत्रकारों )को भारत का चौथा स्तंभ कहा जाता है लेकिन आजकल देहाती इलाकों में भारत के चौथे स्तंभ का बड़े-बड़े मठाधीश चैनल संपादक हो या चैनल मालिक या फिर समाचार पत्र के संपादक देहाती इलाकों में पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों का खुलेआम दोहन करने में लगे हुए 
 आज से कई दशक पहले भारत में चौथे स्तंभ में कार्यरत पत्रकारों को भले ही चैनल संपादक या चैनल मालिक खबर के नाम पर खबर के नाम पर कुछ भी नहीं दिया करते थे लेकिन उनको प्रोत्साहन राशि के रूप में कुछ ना कुछ नगद राशि जरूर देते थे लेकिन आज के समय में देहाती इलाकों में कार्यरत रिपोर्टर को चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हो या फिर समाचार पत्र के  संवाददाता उन्हें खबरों के लिए तो बराबर दबाव डाला जाता है लेकिन देने के नाम पर प्रोत्साहन राशि को छोड़िए ₹1 का नोट भी नहीं भेजा जाता सबसे दुखद बात तो यह है कि किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में रिपोर्टर बनने के लिए ना तो पत्रकार की डिग्री पर ध्यान दिया जाता है ना ही उसके एक्सपीरियंस पर बल्कि 15 से ₹3 हजार लेकर उन्हें रिपोर्टर की पदवी दे दी जाती है कई ऐसे रिपोर्टर आज के समय में चैनलों से जुड़े जिन्हें पत्रकारिता का शौक तो है लेकिन जॉइनिंग के समय उन्होंने अपने घर के कई सामान ड्यूटी रखकर चैनल के मठाधीशों को राशि जमा कर चैनल लेकर कार्य कर रहे हैं शुरुआत में इन चैनल के मठाधीश अपने रिपोर्टर को कई बड़े बड़े ख्वाब दिखाते हैं कई तरीके की सैलरी देने की बात करते हैं लेकिन बाद में शायद ही जिला छोड़िए तहसील का कोई रिपोर्टर होगा जिसे चैनल खबर के नाम पर पैसे देता हो आखिर तहसील स्तर पर पत्रकार रिपोर्टर एक खबर बनाने में ₹200 से लेकर ₹400 खर्च करता है और उस खबर को बनाकर चैनल पर भेजता है चैनल का भी फर्ज है कि उस रिपोर्टर को कुछ ना कुछ प्रोत्साहन राशि जरूर दे...
 
विवेक कुमार पाण्डेय 
सीनियर रिपोर्टर इलेक्ट्रानिक मीडिया लहार