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" चले जा रहे हम "

माधवी श्रीवास्तव       18-09-26

  • "   चले जा रहे हम "

दिल में एक लौ जली 

बनकर लहर तुम तक पहुँची 

हम -तुम , तुम -हम बहे जा रहे 

वस चले जा रहे ....

 

कुछ ख्वाब अधूरे से 

कोई चाहत दिल में दबी सी 

ख्वाहिशों का समर्पण किये जा रहें 

वस चले जा रहे ...

 

कुछ फर्ज़ है कुछ कर्ज़ है 

जिंदगी तो नही बेदर्द  है 

वक्त से समझौते पल पल किये जा रहे 

वस चले जा रहे ...

 

कुछ दिल की जमीं तेरी 

कुछ दिल की जमीं मेरी 

नाम एकदूजे का लिखकर मिटाते जा रहे 

वस चले जा रहे ..वस चले जा रहे ..वस चले जा रहे 

(माधवी श्रीवास्तव )