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ड्रेस कोड का विरोध शुरू, उलेमा ने कहा- मदरसों को सरकार बना रही निशाना


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Posted By : Sunil Rajak    2018-07-04  

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मदरसों में एनसीआरटी पाठ्यक्रम लागू करने के बाद अब वहां ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी की जा रही है। मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने मंगलवार को हज हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से कहा कि मदरसों में भी जल्द ड्रेस कोड लागू होगा।

 

हालांकि, फिलहाल यह साफ नहीं है कि उनकी ड्रेस का रंग क्या होगा। सरकार इसके लिए जल्द ही एक औपचारिक आदेश जारी करेगी। रजा के इस बयान के बाद सरकार के इस कदम का विरोध हो गया है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा है कि सरकार मदरसों को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि यूपी की वर्तमान सरकार के पास मदरसों को टारगेट करने के अलावा कोई दूसरा एजेंडा नहीं है।

 

वही दारुल उलूम फिरंगी महल मदरसा ने भी इसका विरोध किया है। मदरसे के उलेमा मोहम्मद हारून के अनुसार यह हम पर छोड़ दिया जाना चाहिए कि मदरसों के लिए क्या सही है। किसी भी हाल में 1-2 प्रतिशत मुस्लिम बच्चे मदरसों में पढ़ते हैं। सरकार को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए।

 

इनके अलावा मुस्लिम क्लेरिक सुफियान निजामी ने कहा है कि देश में चल रहे सभी मदरसों और कॉलेजेस के लिए ड्रेस कोड सरकार तय नहीं करती है। इसका फैसला संस्थान की मैनेजिंग कमेटी करती है। तो फिर मदरसों के साथ इस तरह का भेदभाव क्यों?

बता दें कि रिजवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मदरसों में भी जल्द ड्रेस कोड लागू होगा। अभी यहां के छात्र कुर्ता-पायजामा ही पहनते हैं। लोगों ने इसे ही मदरसों का ड्रेस कोड समझ लिया है। ड्रेस कोड होने से यहां के लड़कों में भी छात्र वाली भावना जागृत होगी। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा।

 

उन्होंने कहा कि मदरसों में ऊंचे पायजामे के साथ कुर्ता पहन कर छात्र आते हैं। इससे उनकी पहचान एक धर्म विशेष से होती है। मदरसे के छात्रों के बीच इसे खत्म करना जरूरी है। मदरसों में नया ड्रेस कोड किस रंग का होगा इसे लेकर अभी विचार चल रहा है। जल्द ही सरकार इस पर अंतिम निर्णय लेगी।

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