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आज़ाद देश के वासी बंधन में रहते हैं

वैशाली जोशी ग्वालियर मप्र       18-10-21

आज़ाद देश के वासी बंधन में रहते हैं
कुछ सोच के गुलाम है कुछ लोगों के गुलाम है कुछ हालात के तो कुछ रूढ़िवादी परंपरा के गुलाम है
फिर भी देखो हमारा देश महान है
 
उन्हें क्या आज़ाद करना जो बंधे ही नही
रिश्तों का मतलब जिन्हें पता ही नही
उनका दोष नही ,समझ ही नही पाए होंगे
संस्कार घर के उन्होने वैसे ही बनाये होंगे
 
लिखावट में भी एक आवाज़ है
गर वो न होती तो देश मे बदलाव न होते
चन्द बदलावो की वजह तो लिखावट ही है
 
अभी अधूरी है वो अभी पूरी बतानी है
ज़िन्दगी है हर किसीकी नहीं कोई कहानी है
सोचती हूँ देश की सोच कलम से उतार दूँ
पर रक्त नही अब बचा जिसका जज़्बा बयाँ करूँ
 
वैशाली जोशी
सिन्दे की छावनी ग्वालियर मप्र