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नेता-आकांक्षा

      18-11-13

रखता हूँ बस राजनैतिक ख़्वाब हमेशा

कुर्सी मात्र से इशक करूं,

सत्ता ही मेरा परम भगवन 

जन-हित के नाम पर बस अपनी जेबें भरुं ।

 

 

घूस न कभी मैं लेता बाबा

बस मिठाई लेने का काम करूं,

मेज़ के नीचे से प्यार हूँ सढ़क वाता 

नहीं तो सारे काम में देरी करूँ । 

 

 

गरीबों का खुलकर चीर मैं करता 

महंगाई ला घाव उनके गम्भीर करूं , 

सोते जागते एक ही स्वप्न हूँ देखता 

कि अगला नीरव मोदी मैं ही बनूँ। 

 

नेता, नेता न जाने मैं कैसे बन गया 

अभिनेता भी मैं बड़ा कमाल हूँ,

मगरमच्छ आँसू हथियार मेरा 

बहाता मैं सदाबहार हूँ। 

 

तुम क्या जानो वोट के लिए 

मैं कैसे पैंतरे आजमाता हूँ,

दो दिन गरीब का राशन भर,

सालों साल उन्हें लुटवाता हूँ।

 

एक वादा अमर और सच्चा

जो मैं सदैव निभाता हूँ,

बनी बनाई सड़कें खुदवा

फिर उनको ही बनवता हूँ ।

 

कुर्बान फौजी को शहीद बोल 

बस चंद फूल छिड़क आता हूँ ,

मगर खिलाडी,अभिनेता पर अरबों लुटा ,

उन्हें पद्मश्री भी दिलवाता हूँ।

 

इंसाफ की क्यों उम्मीद लगाते 

एक सच से वाकिफ़ तुम्हें करवाता हूँ ,

सारे अपराधी भाई-बंधू मेरे 

सहारे इनके सीढ़ी चढ़ अपनी कुर्सी मैं पाता हूँ ।

 

बेईमानी की खुली किताब बन

अमन छीन देश को लड़वाता हूँ,

विकास, तरक्की के नाम पर 

आरक्षण का झुनझुना मैं बजाता हूँ।

 

गुणगान मेरे जग ये गाये 

भगवान जो मुझे अख़बार बताये ,

तो एक बात मैं भी बतलाता हूँ 

मीडिया भी खरीदा मैंने 

संग मिल इनके मैं बड़ी सिद्धत से उल्लू तुम्हें बनाता हूँ ।

 

हिन्दू मुस्लिम साथ रहे 

ये कैसे मैं सह पाउँगा ,

एकता यूँ देख इनकी 

मैं तो कुर्सी से गिर जाऊंगा ।

 

पेट जो इनका भर दिया 

तो अपनी तिजोरी न भर पाऊँगा ,

धर्म-जाती में जो इनको बाँट न पाया 

तो क्या ख़ाक नेता कह लाऊंगा ।

 

 

आकांक्षा भटनागर

ग्वालियर मप्र