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पढ़िए लेखक प्रियांशु गोयल द्वारा कविता "कौम मेरा इश्क़"


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Posted By : Sunil Rajak    2018-07-31  

Title - कौम मेरा इश्क़

सजदे कर हजार,

नफ़रत को तेरी अपनाया है 

प्यार का अपना,

मैने भोग तुझे रोज लगाया है 

कौम मेरा इश्क़,

मैने खुदा तुझे बनाया है

याद में तेरी,

मैने खुदको यू रुलाया है

आंसूओं का टीका,

तस्वीर पे तेरी लगाया है

कौम मेरा इश्क़,

मैने खुदा तुझे बनाया है

पत्थर तेरा दिल,

मैने फूलों से सजाया है

भर्म है तू कोई,

जिसे हकीकत मैने बनाया है

कौम मेरा इश्क़,

मैने खुदा तुझे बनाया है

मैने वादे को तेरे,

गीता - क़ुरान जैसे अपनाया है

मंदिर मान तेरा घर,

दर पे तेरे सिर यू झुकाया है

कौम मेरा इश्क़,

मैने खुदा तुझे बनाया है

याद किया तुझको,

फिर क्यों तूने मुझे भुलाया है

इबादत कर दिल से

मैने तुझको तुझी से चुराया है

कौम मेरा इश्क़,

मैने खुदा तुझे बनाया है

जुनून नहीं तू कोई,

मैने अपना जहान तुझे बनाया है

रूठी थी तू जब भी मुझसे

भक्त बन तेरा मैने तुझे मनाया है

कौम मेरा इश्क़,

मैने खुदा तुझे बनाया है

लेखक-प्रियांशु गोयल,ग्वालियर (मध्यप्रदेश)

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