राजस्थान की धरती से शुरू हुई एक शैक्षणिक क्रांति, जो आज तकनीकी, मेडिकल और रोजगारोन्मुख शिक्षा का राष्ट्रीय मॉडल बनती जा रही है।
भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था तेजी से बदल रही है। आज केवल डिग्री ही सफलता का पैमाना नहीं रही, बल्कि रोजगार, कौशल, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और वैश्विक अवसरों के लिए तैयार होना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
ऐसे दौर में कुछ संस्थान केवल शिक्षा नहीं देते, बल्कि भविष्य का निर्माण करते हैं। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित शेखावटी ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन्स इसी परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है।
आज SGI केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक बहु-विषयक शैक्षणिक इकोसिस्टम बन चुका है, जहां आधुनिक तकनीक, उद्योगोन्मुख शिक्षा, अनुसंधान, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, प्लेसमेंट और व्यक्तित्व विकास को एक ही परिसर में समाहित किया गया है
संस्थान के अनुसार, पिछले 26 वर्षों में इसने हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, सरकारी सेवाओं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
एक सपना जिसने बदल दी हजारों युवाओं की दिशा
हर बड़ी संस्था की शुरुआत एक विचार से होती है। SGI की कहानी भी एक ऐसे ही संकल्प से शुरू हुई।
संस्थान की स्थापना इंजीनियर रणजीत सिंह ने उस समय की, जब अधिकांश युवा इंजीनियरिंग के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों या विदेशों की ओर बढ़ना चाहते थे।
कम्प्यूटर साइंस इंजीनियर होने के बावजूद उन्होंने अलग राह चुनी। उनका विश्वास था कि यदि गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो, तो प्रतिभाशाली युवाओं को अपने सपनों के लिए महानगरों या विदेशों की ओर पलायन नहीं करना पड़े।
इसी सोच के साथ 6 मई 2001 को कम्प्यूटर एवं प्रोफेशनल एजुकेशन से शुरुआत हुई। प्रारंभ में BBA, BCA, MBA और MCA जैसे रोजगारोन्मुख कार्यक्रम संचालित किए गए।
समय के साथ यह प्रयास राजस्थान के अग्रणी तकनीकी एवं मेडिकल शिक्षण समूहों में विकसित हो गया। लगभग 90 एकड़ में फैला हरित एवं आवासीय परिसर विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए तैयार किया गया है














