उज्जैन। सिंहस्थ-2028 में अब दो वर्ष से भी कम समय बचा है, लेकिन लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही उज्जैन–झालावाड़ फोरलेन परियोजना अब भी टेंडर प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ सकी है।
19 मार्च 2026 को जारी निविदा की अंतिम तिथि आठ संशोधनों के बाद भी बार-बार बढ़ रही है और अब 28 जुलाई तय की गई है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि जब ठेकेदार का चयन ही नहीं हो पाया, तब 730 दिन में निर्माण पूरा कर सिंहस्थ से पहले यह सड़क कैसे तैयार होगी?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने उज्जैन से राजस्थान के झालावाड़ तक राष्ट्रीय राजमार्ग-552जी को फोरलेन बनाने की योजना दो पैकेजों में तैयार की है। करीब 160 किलोमीटर लंबे इस कारिडोर की कुल अनुमानित लागत 2721.72 करोड़ रुपये है। पहले पैकेज में खिलचीपुरा से आकली-कड़िया तक 86.50 किलोमीटर सड़क का निर्माण 1462.19 करोड़ रुपये से किया जाएगा, जबकि दूसरे पैकेज में आकली-कड़िया से झालावाड़ (एनएच-52 जंक्शन) तक 72.763 किलोमीटर सड़क 1259.53 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी।
परियोजना को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर बनाया जाना है। अनुबंध की शर्तों के अनुसार निर्माण एजेंसी को कार्य पूरा करने के लिए 730 दिन और इसके बाद पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। लेकिन परियोजना अभी तक निविदा प्रक्रिया में ही उलझी हुई है। ताजा संशोधन -8 के अनुसार अब आनलाइन बिड जमा करने की अंतिम तारीख 28 जुलाई तथा तकनीकी निविदा खोलने की तारीख 29 जुलाई निर्धारित की है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय बिड का परीक्षण, सफल एजेंसी का चयन, अनुबंध, कार्यादेश और साइट हैंडओवर जैसी औपचारिकताओं में समय लगेगा। इसके बाद ही निर्माण एजेंसी मौके पर काम शुरू कर सकेगी। यानी हर बार बढ़ती समय-सीमा का सीधा असर परियोजना की शुरुआत पर पड़ रहा है।
वर्तमान में मार्ग का अधिकांश हिस्सा टू-लेन
यह सड़क सिंहस्थ की दृष्टि से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्थान के झालावाड़, कोटा, हाड़ौती क्षेत्र के साथ आगर-मालवा, सुसनेर और मालवा अंचल से आने वाले लाखों श्रद्धालु इसी मार्ग से उज्जैन पहुंचते हैं। वर्तमान में मार्ग का अधिकांश हिस्सा टू-लेन का है, जहां भारी वाहनों का दबाव, ओवरटेकिंग और दुर्घटनाएं आम समस्या हैं। सिंहस्थ के दौरान यातायात का दबाव कई गुना बढ़ने की संभावना है। टू-लेन सड़क 2023 में ही बनकर तैयार हुई थी। कहा गया है कि फोरलेन परियोजना पूरी होने पर केवल सिंहस्थ ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच सड़क संपर्क भी मजबूत होगा। दिल्ली-मुंबई कारिडोर तक बेहतर पहुंच, व्यापार, कृषि परिवहन, औद्योगिक निवेश और धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। हालांकि फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या परियोजना समय पर धरातल पर उतर पाएगी या सिंहस्थ की तैयारियों में यह भी देरी का शिकार बन जाएगी।
हर बढ़ती तारीख, बढ़ती चिंता
मार्च में टेंडर जारी होने के बाद से परियोजना आठ संशोधनों तक पहुंच चुकी है। निर्माण शुरू होने से पहले अभी ठेकेदार का चयन, कार्यादेश और साइट हैंडओवर जैसी कई प्रक्रियाएं बाकी हैं। जबकि अनुबंध के अनुसार निर्माण पूरा करने में ही 730 दिन लगेंगे। ऐसे में हर बढ़ती समय-सीमा सिंहस्थ-2028 की तैयारियों पर दबाव बढ़ा रही है। समय पर निर्णय और तेज क्रियान्वयन ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना को महापर्व से पहले पूरा करा सकता है।













